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करवा चौथ

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                                               करवा चौथ :-              हिन्दू धर्म में कार्तिक माह की चतुर्थी के दिन विवाहित महिलाओं द्वारा करवा चौथ का व्रत किया जाता है। यह व्रत पति की दीर्घायु , उनकी मंगलकामना और अखंड सौभाग्य की कामना से करती हैं। इस दिन करवा यानि मिट्टी के जल-पात्र की पूजा कर चंद्रमा को अघ्र्य देने का महत्व है। इसीलिए यह व्रत करवा चौथ नाम से  मशहूर है | प्रति वर्ष कृष्ण और शुक्ल पक्षों में कुल मिला कर २४ गणेश चौथ होती है ! इनमे से कार्तिक वदी चौथ करवा चौथ और माघ वदी चौथ सकट चौथ कहलाती है ! नाम में क्या? हिंदू धर्मं के सरे व्रत और त्यौहार किसी न किसी ज्योतिषीय कारणों के परणीत होते है तथा ज्योतिष ही  इनका आधार है ! राशि चक्र के चार ख...

NAVARATRI KYUN ??

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   भारत वर्ष त्योहारों और रस रंग का देश है ! मगर, यह सप्ष्ठ होना अयाश्यक है की ऐसा क्यूँ है की भारत में इतने तीज त्यौहार मनाये जाते है ! नवरात्रि तो विशेषतया, इन त्योहारों के मौसम का आरंभ   है ! इसका बहुत साधारण सा उत्तर है की हमारे ऋषि मुनियों ने समय की अवधारणा को अच्छे ढंग से समझा था , और , यहाँ  तक की समय का आकलन विभिन्न ग्रहों के संधर्भ में भी सही सही किया था ! इसी प्रकार मनुष्य  और  देवताओं के समय काल  का अंतर भी हमारे ऋषि मुनिओं ने ठीक प्रकार से समझा था ! दरअसल , देवताओ और मनुष्य के इसी समय के  अंतर  से सारी श्रष्टि चलायमान है !                                                          प्रथ्वी  पर होने वाला एक वर्ष देवताओं का एक अहोरात्रि यानि दिन + रात होता   है, ऋषि मुनिओं ने समय के मिलन काल  का विशेष महत्व बताया है ! इसी लिए संध्या वंदन का  प्रावधान कि...

बसंत पंचमी

वसन्त पंचमी वसंत पंचमी एक भारतीय त्योहार है, इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन स्त्रियाँ पीले वस्त्र धारण करती हैं। प्राचीन भारत में पूरे साल को जिन छह मौसमों में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था।जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों मे सरसों का सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर बौर आ जाता और हर तरफ़ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा जश्न मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती, यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। बसन्त पंचमी कथा सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों आ॓र मौन छाया रहता है।...